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सरकार ने की कई राज्यों के लिए राज्यपाल की नियुक्ति, जानिए किस को मिली कहाँ की कमान

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सरकार ने की कई राज्यों के लिए राज्यपाल की नियुक्ति, जानिए किस को मिली कहाँ की कमान

नरेंद्र मोदी की अगुवाई में केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री आरिफ मोहम्मद खान केरल राज्य का राज्यपाल नियुक्त किया है. इसके साथ साथ हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कलराज मिश्रा को राजस्थान ट्रांसफर वहां का राज्यपाल बनाया गया है और उनकी जगह पूर्व केंद्रीय मंत्री बंदरो दत्तात्रेय को हिमाचल प्रदेश का राज्य दिया गया है. इनके अलावा महाराष्ट्र के राजयपाल के रूप में पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी की नियुक्ति की गयी है. और तमिलिसाई सौंदराजन को तेलंगाना के राजभवन में नियुक्त किया गया है.

सरकार ने की कई राज्यों के लिए राजयपाल की न्युकिती, आरिफ मोहमद खान को मिली कहाँ की कमान

आरिफ मोहमद खान का राजनीतिक जीवन

आपको बताते चले की आरिफ मोहम्मद खान ने हल ही में ट्रिपल तलाक जैसे अहम् मसले पर सरकार का समर्थन किया था. उन्हें एक जुझारू और प्रगतिशील मुस्लिम चेहरे के तौर पर जाना जाता है. साथ ही साथ आपको बता दे आरिफ खान किसी समय राजीव गाँधी की सरकार में भी केंद्रीय मंत्री थे. उन्होंने 1984 में शाहबानो केस में सुप्रीम कोर्ट को संसद के द्वारा कानून बनाकर पलट देने के विरोध में उन्होंने इस्तीफा दिया था. उसके बाद वो कुछ समय तक बीजेपी में रहे थे. हालाँकि कुछ सालो से उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी सी बना ली थी.

सरकार ने की कई राज्यों के लिए राजयपाल की न्युकिती, आरिफ मोहमद खान को मिली कहाँ की कमान

आरिफ मोहम्मद खान का जन्म उतर प्रदेश के बुलंदशहर में 1951 में हुआ. बराबस्ती से ताल्लुक रखते हुए दिल्ली के जामिया मिलिया स्कूल में पढ़ाई की. उसके बाद उन्होंने अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय और लखनऊ के शिया कॉलेज से उच्च शिक्षा हासिल की.

आपको बता दे की छात्र जीवन के साथ ही आरिफ मोहमद खान राजनीति से जुड़ गए थे. उनके राजनीति की शुरुआत भारतीय क्रांति दाल नाम की लोकल पार्टी के टिकट पर पहली बार बुलंदशहर की सियाना सीट से विधानसभा का चुनाव लड़े थे. लेकिन तब उन्हें हार का सामना हुआ था फिर 26 साल की उम्र में आरिफ खान पहली बार विधायक के रूप में चुने गए.

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कांग्रेस पार्टी छोड़ने की वजह क्या थी ?

विधायक चुने जाने के बाद आरिफ मोहमद खान ने कांग्रेस पार्टी की सदस्य्ता ली और उसके बाद 1980 में कानपुर और 1984 में बहराइच से लोकसभा का चुनाव जीतकर सांसद सुने गए. इसी दरमियान शाहबानो केस चल रहा था और आरिफ मुस्लिम महिलाओ के और अधिकारियो के समर्थन में मुसलमानो के प्रगतिशीलता की वकालत कर रहे थे. लेकिन जब मुस्लिम समाज और राजनीति का एक वर्ग इन विचारो के विरोध में थे. 1986 में राजीव गाँधी और कांग्रेस के रवैये से नाराज होकर आरिफ ने कांग्रेस पार्टी और अपना मंत्री पद दोनों छोड़ दिया था.

ट्रिपल तलाक में उनकी भूमिका

कांग्रेस पार्टी छोड़ने के बाद आरिफ मोहमद खान ने जनता दल का हाथ थामा और उसके बाद वो फिर से 1989 सांसद चुने गए. जनता दल में रहने के दरमियान आरिफ ने नागरिक उड्डयन मंत्री के रूप में काम किया. लेकिन उसके बाद आरिफ ने जनता दल का साथ छोड़ कर बहुजन समाज पार्टी का दामन थाम लिया और 1998 में चुनाव जीतकर संसद पहुंचे. उसके बाद उन्होंने 2004 में बीजेपी ज्वाइन की और कैसरगंज से चुनाव हारने के बाद उन्होंने बीजेपी का साथ भी छोड़ दिया. बाद में 2014 में मोदी सरकार के साथ बात चीत कर उन्होंने तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाये जाने की प्रक्रिया में बहुत ही अहम् भूमिका निभाई.

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