हरियाणा में भाजपा का ये दांव बन चुका है कांग्रेस के लिए नई मुसीबत

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हरियाणा में भाजपा का ये दांव बन चुका है कांग्रेस के लिए नई मुसीबत

भाजपा हरियाणा में लगातार अपने आप को हर तरीके से मजबूत करने में जुटी है. वो विपक्ष को कोई भी मौका नहीं देना चाहती जिसके चलते उन्हें इस चुनाव में हार का मुंह देखना पड़े. इसलिए अब भाजपा ने एक ऐसे चेहरे को चुनाव में उतारने का मन बना लिया है. जिसका तोड़ कांग्रेस के पास तो क्या हरियाणा की किसी पार्टी के पास भी नहीं होगा.

बरोदा विधानसभा सीट को 10 साल पहले भले ही कांग्रेस ने इनेलो से छीन लिया हो, लेकिन इस बार भाजपा ने इस सीट से पहलवान योगेश्वर को चुनावी दंगल में उतारकर इसे हॉट सीट बना दिया है. योगेश्वर दत्त के मैदान में आने से कांग्रेस को कड़ी टक्कर मिल रही है. जहां कांग्रेस के श्रीकृष्ण हुड्डा के लिए हैट्रिक बनाना बड़ी चुनौती है.

हरियाणा में भाजपा का ये दांव बन चुका है कांग्रेस के लिए नई मुसीबत

जाट बहुल सीट पर तीन प्रमुख पार्टियों कांग्रेस, इनेलो व जजपा से जाट प्रत्याशी मैदान में उतरे हुए हैं तो भाजपा ने इसका फायदा लेने के लिए ब्राह्मण को मैदान में उतारा है. बरोदा विधानसभा सीट पर वर्ष 2000 में इनेलो का कब्जा रहा. इसके बाद वर्ष 2005 में भले ही प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी हो, लेकिन बरोदा सीट पर इनेलो का ही कब्जा कायम रहा.

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साल 2009 के चुनाव में कांग्रेस के श्रीकृष्ण हुड्डा ने जीत दर्ज कर बरोदा सीट को इनेलो से छीन लिया. वहीं वर्ष 2014 में जब प्रदेश में पूर्ण बहुमत के साथ भाजपा की सरकार बनी. तब भी कांग्रेस के श्रीकृष्ण हुड्डा का बरोदा पर कब्जा कायम रहा. इस सीट को कांग्रेस से छीनने के लिए भाजपा ने अपना आखिरी दांव योगेश्वर दत्त पर खेला है.

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बरोदा जाट बहुल क्षेत्र होने के कारण सभी प्रमुख पार्टियों के जाट प्रत्याशी उतारा जाना लगभग तय था. इसलिए कांग्रेस से जहां दो बार से विधायक श्रीकृष्ण हुड्डा चुनावी मैदान में उतरे हुए हैं. वहीं इनेलो से जोगेंद्र मलिक तो जजपा से भूपेंद्र मलिक तीनों जाट प्रत्याशी मैदान में हैं.

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वोटों का गणित

बरोदा विधानसभा क्षेत्र में कुल 1 लाख 76 हजार 158 वोटर हैं, जिनमें से 96804 पुरुष और 79354 महिला वोटर है. इस सीट पर सबसे ज्यादा लगभग 50% जाट वोटर हैं तो अन्य में अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग, ब्राह्मण आदि शामिल है.

यह हैं प्रमुख मुद्दे

मुख्य मुद्दों में पेयजल की समस्या सबसे ज्यादा है. विधानसभा क्षेत्र के अधिकतर गांवों में लोगों को पेयजल के लिए जूझना पड़ता है और खेतों से पानी लाकर प्यास बुझानी पड़ती है. इस समस्या का अभी तक कोई भी सरकार समाधान नहीं कर सकी। क्षेत्र में कोई भी कॉलेज नहीं है, जिससे युवक व युवतियों को कक्षा 12वीं के बाद पढ़ाई करने के लिए कई किलोमीटर दूर गोहाना आना पड़ता है. जिसके लिए परिवहन व्यवस्था भी सही नहीं है. क्षेत्र में कोई उद्योग नहीं होने के कारण रोजगार की बड़ी समस्या है.

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