CBI ने दिए वो सबूत जिनका चिदंबरम के पास कोई जवाब ही नहीं था – नहीं मिली जमानत

CBI ने दिए वो सबूत जिनका चिदंबरम के पास कोई जवाब ही नहीं था – नहीं मिली जमानत

CBI आईऐनएक्स मीडिया केस में कांग्रेस के पूर्व मंत्री पी चिदमबरम से पूछ ताछ कर रही है. जिसमे वो फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड की मंजूरी और कार्ति चिदंबरम की कंपनी द्वारा ली गयी कंसल्टेंसी फीस के बारे में पूछ ताछ कर रहे है. CBI का दावा है की एडवांस कंसल्टिंग कंपनी ने आईएनएक्स मीडिया से एफआईपीबी की मंजूरी के लिए पैसा लिया था.

CBI ने दिए वो सबूत जिनका चिदंबरम के पास कोई जवाब ही नहीं था - नहीं मिली जमानत

आज आईएनएक्स मीडिया केस में कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से जमानत नहीं मिली. इस मामले में CBI और चिदंबरम की दलीले सुनने के बाद कोर्ट ने पी चिदंबरम को 26 अगस्त 2019 तक CBI की न्यायिक हिरासत में भेजने का फैसला सुनाया है. इस दौरान CBI चिदंबरम से केस सभी पहलु के बारे पूछताछ करेगी और जांच को आगे बढ़ाएगी.

इस मामले में CBI की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और पी चिदंबरम की तरफ से एडवोकेट कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंघवी केस लड़ रहे है. हालांकि सीबीआई के सबूत के सामने कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंघवी की सारी की सारी दलीलें धरी रह गईं. दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने चिदंबरम को CBI की हिरासत में भेज दिया. ऐसे में सभी के मन में सिर्फ ये सवाल थे की आखिर CBI ने ऐसे क्या सबूत दिए कोर्ट में जिससे कोर्ट ने पी चिदंबरम को जेल भेज दिया ?

ये है CBI द्वारा कोर्ट में दिए गए कुछ सबूत

सीबीआई का दावा है कि एडवांस स्ट्रैटेजिक कंसल्टिंग प्राइवेंट लिमिटेड और अन्य सहयोगी कंपनियों ने आईएनएक्स मीडिया से FIPB की मंजूरी के लिए पैसा लिया था. इन कंपनियों को कार्ति चिदंबरम ने बनाया है.

CBI ने दिए वो सबूत जिनका चिदंबरम के पास कोई जवाब ही नहीं था - नहीं मिली जमानत

सीबीआई के अनुसार कार्ति चिदंबरम और पी चिदंबरम ने आईएनएक्स मीडिया की मदद की थी. आईएनएक्स मीडिया ने FIPB की मंजूरी के लिए चिदंबरम की कंपनी को जेनेवा, अमेरिका और सिंगापुर के बैंकों से पैसे ट्रांसफर किया. इस मामले की जांच से बरामद हुए दस्तावेजों से ये साफ होता है कि पैसे का भुगतान FIPB की मंजूरी के लिए किया गया. उस समय पी चिदंबरम देश के वित्त मंत्री थे. और उन्होंने एफआईपीबी की मंजूरी देने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया.

सीबीआई का यह भी दावा है कि चिदंबरम के बेटे की कंपनियों ने दिखावे के लिए फेक तरीके से क्रिएटिव मीडिया कंटेंट और मार्केट रिसर्च के नाम पर कंसल्टेंसी उपलब्ध कराई. लेकिन इन बातो से परे पी चिदंबरम और आईएनएक्स मीडिया के बीच सीधे रूप से संबंध होने के कोई दस्तावेज नहीं मिले है.

ED ने पत्र लिखकर दिया था जानकारी

दिसंबर 2016 में ईडी ने CBI को इस मामले में एक पत्र लिखा था, जिसमें कहा गया कि मामले की जांच में खुलासा हुआ है कि ASCPL ने कंसल्टेंसी के नाम पर पैसा लिया है और इसका मकसद वित्त मंत्रालय से FIPB की मंजूरी दिलाना था. ईडी ने CBI को लिखे खत में कहा था कि इसको लेकर ASCPL ने कोई कंसल्टेंसी और टेंडर एडवाइस नहीं निकाला. ईडी ने यह भी लिखा था कि ASCPL पर कार्ति चिदंबरम का मुख्य रूप से नियंत्रण है और इस कंपनी को कार्ति चिदंबरम को फायदा पहुंचने के लिए बनाया गया है.

ईडी ने CBI को यह भी बताया कि ASCPL के परिसर से बरामद हुए दस्तावजों से खुलासा हुआ कि आईएनएक्स मीडिया ने ASCPL को 15 जुलाई 2008 को चेक के लिए भुगतान किया. आईएनएक्स के MD और CFO ने भी ASCPL को भुगतान करने की की बात स्वीकार की है.

उन्होंने यह भी कहा कि FIPB की मंजूरी के लिए ASCPL को पैसे का भुगतान किया गया था. साथ ही साथ उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस चेक में इंद्राणी मुखर्जी के दस्तखत थे. इसके बाद ही 11 नवंबर 2008 को आईएनएक्स न्यूज को वित्त मंत्रालय से मंजूरी मिल गई.

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