एक्शन में आई मोदी सरकार, राज्यों से माँगा हिसाब-किताब

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एक्शन में आई मोदी सरकार, राज्यों से माँगा हिसाब-किताब

लॉकडाउन को तक़रीबन 2 महीने से ऊपर का समय हो चला है और अभी भी दिन-प्रतिदिन कोरोना मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है. इन 2 महीनों में हमने लॉकडाउन के 3 चरण पहले ही देख लिए हैं जिनमे कम्पलीट क्वारंटाइन से लेकर आंशिक छूट जैसे फैसले देखने को मिले. 18 मई से लॉकडाउन का चौथा चरण शुरू हो चुका है और भारत सरकार ने अब कई राज्यों में छूट भी दे दी है. लेकिन इस सबके बीच एक बार फिर मोदी सरकार एक्शन में आ गई है और उसने राज्यों को दिए गए आर्थिक पैकेज पर अब हिसाब मांग लिया है.

एक्शन में आई मोदी सरकार, राज्यों से माँगा हिसाब-किताब

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने लॉकडाउन के दौरान जरूरतमंदों और प्रवासी मजदूरों की सहायता कार्यों का हिसाब-किताब राज्य इकाइयों से मांगा है. ताकि स्टेट यूनिट के कार्यों का मूल्यांकन किया जा सके. बीजेपी (BJP) शीर्ष नेतृत्व ने सात दिनों का मौका सभी राज्य इकाइयों को दिया है. इस बीच पार्टी ने रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है.

जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय मुख्यालय में ये रिपोर्ट 7 दिनों के अंदर देने को कहा गया है. इस रिपोर्ट में कई सवालों का जवाब देना होगा. मसलन, कितने जरूरतमंदों को भोजन वितरित किया गया, कितनों को राशन बांटा गया. इसके अलावा प्रत्येक राज्य इकाई ने कितने मास्क या फेस कवर बांटे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पार्टी कार्यकर्ताओं से पीएम केयर में दान की अपील की थी. प्रत्येक राज्य इकाइयों को यह भी बताना होगा कि स्टेट के कितने कार्यकर्ताओं ने पीएम केयर (PM Care Fund) में दान किया. इसके अलावा पार्टी कार्यकर्ताओं ने कितने लोगों के मोबाइल में आरोग्य सेतु ऐप डाउनलोड कराया, इसका भी पार्टी मुख्यालय ने हिसाब मांगा है.

हाल ही में महानगरों से सैकड़ों किमी दूर गांव जाने के लिए सड़कों पर पैदल निकले प्रवासी मजदूरों को लेकर काफी राजनीति हुई. विपक्ष ने प्रवासी मजदूरों को अपनी राजनीति का मुद्दा बनाया. जिसके बाद पार्टी ने प्रवासी मजदूरों की सहायता का भी निर्देश दिया था. कितने स्थानों पर राहत कार्यों का संचालन हुआ, पार्टी ने इसका भी जवाब मांगा है.

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