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नासा ने किया दावा, ब्लैकहोल ने निगला सूरज के आकार का तारा, पृथ्वी पर पड़ेगा कुछ ऐसे असर

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नासा ने किया दावा, ब्लैकहोल ने निगला सूरज के आकार का तारा, पृथ्वी पर पड़ेगा कुछ ऐसे असर

नासा- ब्लैकहोल अंतरिक्ष का वो अहम हिस्सा है जहां भौतिक विज्ञान के सारे नियम काम करना बंद कर देते हैं. इसके गुरुत्वाकर्षण से कुछ भी नहीं बच पाता. यहां तक कि सूर्य का प्रकाश भी यहाँ जाने के बाद बाहर नहीं निकल पाता. यह अपने ऊपर पड़ने वाले प्रकाश को अँधेरे में परिवर्तित यानी अवशोषित कर लेता है. इसीलिए इसे ब्लैकहोल के नाम से जाना जाता है. साल 2019 के अप्रैल माह में ही वैज्ञानिकों ने एक तस्वीर जारी की थी. जिसे देख कर पूरी दुनिया में हलचल हो गई थी.

यह तस्वीर पृथ्वी के सबसे निकटतम ब्लैकहोल एम्-87 की थी. इससे पहले 24 साल पहले एक ब्लैकहोल विद्यमान होने का पता चला था जिसका नाम था सेजिटेरस ए स्टार. यह आकाशगंगा मिल्की वे के केंद्र में स्थित है. इसे एक शांत ब्लैकहोल माना जाता है. लेकिन हाल ही में इस ब्लैकहोल की गतिविधियों में हलचल महसूस की गई है.

नासा ने किया दावा

सूर्य से लगभग 60 गुना वजनदार है ये ब्लैकहोल

हाल ही में, शोधकर्ताओं ने ब्लैकहोल द्वारा ब्रह्मांडीय उथल-पुथल के तहत सूर्य के आकार के एक तारे में ब्लैकहोल में समाहित होने की बात कही है. इसके बारे में बताया जा रहा है कि ये ब्लैकहोल सूर्य से लगभग 60 गुना अधिक वजनी है. वैज्ञानिकों ने इसे ज्वारीय विघटन (टाइडल डिस्पर्सन) करार दिया है. इस खगोलीय घटना को नासा के उपग्रह ट्रांज़िटिंग एक्सोप्लेनेट (टीइएसएस) और नील गेहरेल्स स्विफ्ट की मदद से देखा गया है. इस घटना के बारे में जानकारी देते हुए नासा ने कहा है कि ब्रह्माण्ड में ऐसी ज्वारीय विघटन की घटना अत्यधिक विरल है. 10,000 सालों में बीच आकाशगंगा में यह घटना होती है. नासा ने इस प्रकार की घटने के अब तक 40 बार होने की पुष्टि की है.

पहले की तुलना में ज्यादा ‘भूखा’ हो गया है ब्लैकहोल

एस्ट्रोफिजिकल जनरल स्टोर्स में छपी एक रिसर्च रिपोर्ट में बताया गया है कि ब्लैकहोल सेजिटेरस ए स्टार पहले की अपेक्षा अब ज्यादा ‘भूखा’ हो गया है. जिससे यह अब अपने आसपास की चीज़ों को ज्यादा तेजी से अपने अंदर समाहित कर रहा है. ब्लैकहोल अपने भीतर से किसी भी तरह के प्रकाश को नहीं निकालता है अपितु समाहित कर लेने के पश्चात् उसे भी अवशोषित कर देता है. हालंकि ब्लैकहोल में आए इन परिवर्तनों से पृथ्वी या आकाशगंगा के किसी भी गृह को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा.

ब्लैकहोल पर 347 वैज्ञानिकों की एक टीम कर रही है रिसर्च

बताना चाहेंगे कि ब्लैकहोल मिशन पर अलग-अलग देशों के 347 वैज्ञानिकों की पूरी एक टीम काम कर रही है. इस टीम के प्रोजेक्ट डायरेक्टर वैज्ञानिक शेप डोएलेमोन ने कहा है कि जिस तरह 2019 में ब्लैकहोल की तस्वीर जारी हुई है उसी प्रकार वैसे ही 2020 में ब्लैकहोल का वीडियो भी जारी किया जाएगा.

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