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शिवसेना-बीजेपी में पहले भी हुआ था 50-50 पर टकराओ, तब कांग्रेस ने ऐसे बना ली थी

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शिवसेना-बीजेपी में पहले भी हुआ था 50-50 टकराओ, कांग्रेस ने बना ली थी सरकार, इस बार फिर…उसी 50-50 की पर बात अड़ी है लेकिन इस बार शिवसेना अड़ी हुयी है.

महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए 50-50 बटवारे पर आके बात अटक गयी है. ऐसा पहली बार नहीं है जब महाराष्ट्र में ऐसा हुआ हो. 1999 में बीजेपी नेता गोपीनाथ मुंडे ने पहली बार ऐसा किया था. लेकिन उस समय शिवसेना राजी नहीं थी. ऐसे में विपक्षी पार्टिया कांग्रेस और NCP ने मिलकर सरकार बना लिया था. इस बार यह शर्त शिवसेना की तरफ से राखी गयी है और इस बीजेपी इस बात पर सहमत नहीं है.

शिवसेना-बीजेपी में पहले भी हुआ था 50-50 पर टकराओ, तब कांग्रेस ने बना

यह घमासान धीरे धीरे बढ़ता जा रहा है. क्युकी दोनों तरफ से नेताओ के बयान आ रहे है. आपको बता दे शिवसेना के संजय राउत ने “दुष्यंत चौटाला को ताना मरते हुए कहा की यहाँ किसी के पिता जेल में नहीं है” तो वही चतला ने भी तीखा जवाब दिया. वही बीजेपी की तरफ से साफ प्रतिक्रिया आ रही है जिसमे फडणवीस ने 50-50 पर कोई सुनवाई नहीं है.

बहुमत के आंकड़े है गठबंधन के पास

आपको बता दें कि पिछले हफ्ते महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों में से बीजेपी को 105, शिवसेना को 56, कांग्रेस को 44, एनसीपी को 54 और अन्य निर्दलीय नेताओ को 29 सीटें मिली हैं. आंकड़ो के लिहाज से बीजेपी-शिवसेना गठबंधन के पास बहुमत के आंकड़े हैं, लेकिन सीएम पद और 50-50 फॉर्मूले पर फंसे पेच के चलते मामला अभी तक अटका हुआ है और कुछ साफ होता दिखाई नहीं दे रहा है.

शिवसेना-बीजेपी में पहले भी हुआ था 50-50 पर टकराओ, तब कांग्रेस ने बना
शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे

क्या है शिवसेना का 50-50 फार्मूला

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने विधानसभा चुनाव नतीजे आने के बाद बीजेपी को 50-50 फॉर्मूले की याद दिलाई. सूत्रों के मुताबिक शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने साफ और कड़े लहजे में महाराष्ट्र में अपनी सहयोगी दल बीजेपी को यद् दिलाते हुए कहा, ‘लोकसभा चुनाव में माननीय अमित शाह और देवेंद्र फडणवीस के साथ जो तय हुआ था, उससे न कम चाहिए और न ज्यादा. जो तय हुआ था उससे एक कण भी अधिक मुझे नहीं चाहिए.’ यानी की, 50-50 फॉर्मूले के मुताबिक ढाई साल सीएम का पद उनके पास और ढाई साल बीजेपी के पास रहे. जिसपर बीजेपी की तरफ से कोई सहमति नजर नहीं आ रही है.

1999 में भी फंसा था ऐसा ही पेंच

यह बात दरअसल 1999 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की है जिसमें किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था. उस समय महाराष्ट्र की 288 सीटों में से कांग्रेस को 75, एनसीपी 58, शिवसेना को 69, बीजेपी को 56, निर्दलीय 12 और अन्य को 18 सीटें मिली थी.

बीजेपी नेता गोपीनाथ मुंडे
बीजेपी नेता गोपीनाथ मुंडे ने 1999 में रखा था शिव सेना के सामने 50-50 फार्मूला

ऐसे में बीजेपी नेता गोपीनाथ मुंडे ने उस समय शिवसेना के सामने 50-50 का फार्मूला रखा था जिसपर शिवसेना राजी नहीं हुयी थी. इस मौके का फायदा उठाया था कांग्रेस और एनसीपी ने इन दोनों पार्टियों ने साथ मिलकर सरकार बना ली थी. उस समय विलासराव देशमुख महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने थे.

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मानने को तैयार नहीं है कोई

इस तमाम खींचतान के बीच देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि शिवसेना की मांगों पर मेरिट के आधार पर विचार हो रहा है, हमारे पास कोई प्लान B या प्लान C नहीं है. लेकिन ये बात पक्की है कि मैं ही मुख्यमंत्री बनूंगा और 50-50 जैसी कोई बात नहीं मानी जाएगी.

शिवसेना-बीजेपी में पहले भी हुआ था 50-50 पर टकराओ, तब कांग्रेस ने बना
देवेंद्र फडणवीस

साथ ही साथ देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि हमारे पास दस निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी है, जल्द ही ये संख्या 10 से बढ़कर 15 तक पहुंचेगी. उन्होंने कहा मुख्यमंत्री पद को लेकर कभी कोई 50-50 फॉर्मूला तय नहीं हुआ. फडणवीस के इस रवैये से साफ़ साफ दिखाई दे रहा है कि बीजेपी महाराष्ट्र में शिवसेना के सीएम पद की मांग को किसी भी सूरत में मानने को तैयार नहीं है.

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